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Saturday 24 October 2026
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paryushan महापर्व का शुभारंभ, आठ दिनों तक तप-साधना और आत्मचिंतन में जुटेगा जैन समाज

जैन धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक पर्व पर्युषण महापर्व का मंगलवार, 8 सितंबर से शुभारंभ हो गया। श्वेतांबर जैन परंपरा में यह पर्व 8 से 15 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु तप, उपवास, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण और ध्यान के माध्यम से आत्मशुद्धि का प्रयास करेंगे।

पर्युषण पर्व को जैन समाज में आत्मचिंतन, संयम, त्याग और क्षमा का विशेष अवसर माना जाता है। इन दिनों श्रद्धालु सांसारिक गतिविधियों को सीमित कर अपने विचारों, वाणी और कर्मों की समीक्षा करते हैं। अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम जैसे जैन सिद्धांतों के पालन पर विशेष जोर दिया जाता है।

तप और साधना का विशेष महत्व
पर्युषण के दौरान जैन मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, प्रवचन, स्वाध्याय और प्रतिक्रमण के आयोजन होंगे। अनेक श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपवास, एकासन और अन्य तप-साधनाएं करते हैं। इस अवधि को बाहरी आडंबर से दूर रहकर आत्मा के निकट जाने और आत्मनिरीक्षण का समय माना जाता है।

15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व
आठ दिवसीय पर्युषण पर्व का समापन 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व के साथ होगा। इस दिन जैन समाज में आत्मालोचना और क्षमायाचना की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु वर्षभर में जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहते हैं।

पर्युषण महापर्व का संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, अहिंसा, करुणा, क्षमा और बेहतर आचरण की प्रेरणा देता है। पर्व के दौरान जैन समाज के लोग आध्यात्मिक साधना के साथ अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेते हैं।




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