Search
Friday 17 April 2026
  • :
  • :
Latest Update

हादसे को दावत देता MP का इंफ्रास्ट्रक्चर, 45 पुलों की हालत खस्ता

हादसे को दावत देता MP का इंफ्रास्ट्रक्चर, 45 पुलों की हालत खस्ता
मध्य प्रदेश में अधोसंरचना विकास के काम तेजी के साथ चल रहे हैं। सरकार पूंजीगत निवेश लगातार बढ़ा रही है, जिसकी सराहना भारत सरकार ने भी की है लेकिन गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कम से कम पुलों के मामले में तो स्थिति ऐसी ही नजर आती है। ग्वालियर में निर्माणाधीन एलिवेटेड कॉरिडोर में गर्डर गिर गया तो जबलपुर में दूसरी बार रेलवे ओवर ब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ। शिवपुरी के पोहरी में फ्लाईओवर का स्लैब गिरने की घटना पहले सामने आ चुकी है, जिसमें मजदूर घायल हो गए थे लेकिन इंजीनियरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

प्रदेश के 45 पुल जर्जर श्रेणी में, सर्वे के बाद टेंडर जारी
उधर, प्रदेश में 45 पुल जर्जर की श्रेणी में हैं। प्रदेश में एक के बाद एक पुलों के क्षतिग्रस्त होने के मामले सामने आने पर लोक निर्माण विभाग ने पूरे प्रदेश में सर्वे कराया और उन पुलों को चिह्नित कराया, जहां काम कराना अनिवार्य है। ऐसे 45 पुल चिह्नित हुए। इनके लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए लेकिन पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटना लगातार सामने आ रही हैं। ग्वालियर अंचल में शिवपुरी पोहरी रोड स्थित रेलवे क्रासिंग पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर ब्रिज का स्लैब गिर गया था। मजदूर घायल हुए।

लापरवाही के बावजूद इंजीनियरों पर कार्रवाई का अभाव
जांच में यह बात सामने आई कि लापरवाही बरती गई लेकिन इंजीनियर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्वालियर में अलाइनमेंट ठीक करने के दौरान 35 फीट लंबा 110 टन वजनी गर्डर गिर गया। ग्वालियर संभाग में पुलों का काम प्रभारी कार्यपालन यंत्री जोगिंदर यादव देख रहे हैं। इसके पहले दतिया क्षेत्र में अतिवर्षा के कारण पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिसकी जांच विभाग ने कराई थी मगर किसी की जिम्मेदारी निर्धारित नहीं हुई। जबकि, भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (CAG) ने 2023 में प्रस्तुत रिपोर्ट में डिजाइन को लेकर सवाल उठाए थे।

मरम्मत के दौरान ढह गया पुल का हिस्सा
उधर, दिसंबर 2025 में रायसेन स्टेट हाईवे पर बरेली से पिपरिया को जोड़ने वाली सड़क पर ग्राम नयागांव में 50 साल पहले बने पुल का एक हिस्सा ढह गया था। यहां मरम्मत का काम चल रहा था। मलबे में कुछ लोग दब गए थे। यह कोई अकेली घटना नहीं है। भोपाल-जबलपुर मार्ग पर शहपुरा के पास रेलवे क्रासिंग के ऊपर बना ओवर ब्रिज दोबारा क्षतिग्रस्त हो गया। सितंबर में पहली और दूसरी बार फरवरी में इसका दूसरा हिस्सा गिर गया। यह पुल 40 करोड़ की लागत से चार साल पहले बना था। निर्माण कर्ता कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है।

11 जिलों में 45 पुल जर्जर
विभागीय अधिकारियों ने कहना है कि सड़क विकास प्राधिकरण ने प्रदेश के सभी पुलों का सर्वे कराया था। इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, धार, खंडवा, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, उज्जैन और रीवा में मरम्मत के लिए पुल चिह्नित किए गए। 19 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी मरम्मत के लिए मंजूर कर दी गई लेकिन अभी टेंडर की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है। जबकि, मानसून के आने में तीन माह रह गए हैं।

सात माह में जांच ही पूरी नहीं
उधर, इंजीनियरों पर कार्रवाई को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। भोपाल के ऐशबाग क्षेत्र में 90 डिग्री कोण वाले पुल की चर्चा देशभर में हुई। जांच के बाद सात इंजीनियरों को निलंबित किया गया। आरोप पत्र जारी किए गए। उन्होंने जवाब भी दे दिए लेकिन निष्कर्ष अभी तक कुछ नहीं निकला है। सातों इंजीनियरों को सात माह बिना काम के राजकोष से वेतन दिया जा रहा है।

मरम्मत के लिए टेंडर किए जारी
उधर, विभाग के प्रमुख अभियंता केपीएस राणा का कहना है कि पुलों का निर्माण अलग-अलग एजेंसियां करती हैं। प्रदेश में जर्जर पुल चिह्नित किए जा चुके हैं। मरम्मत के लिए टेंडर भी जारी कर दिए हैं।




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *