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Monday 26 October 2026
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15 साल बाद Janmashtmi पर खास योग, अष्टमी-रोहिणी नक्षत्र का बन रहा दुर्लभ संयोग

देशभर में आज 4 सितंबर 2026 को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष जन्माष्टमी को विशेष माना जा रहा है, क्योंकि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।

पंचांग के अनुसार इस वर्ष अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर को रात 11:04 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। इस कारण जन्माष्टमी का पर्व धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है।

निशीथ काल में होगी विशेष पूजा
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मध्यरात्रि में मनाने की परंपरा है। इस वर्ष जन्माष्टमी पर निशीथ काल का पूजा मुहूर्त रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक बताया गया है। इस दौरान श्रद्धालु लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक, श्रृंगार और आरती करेंगे।

भक्त भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और पंचमेवा का भोग अर्पित करेंगे। इसके बाद मंत्र जाप और आरती के साथ जन्मोत्सव मनाया जाएगा। कई मंदिरों में आधी रात को शंखनाद और विशेष आरती के साथ भगवान के प्राकट्य का उत्सव होगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार जन्माष्टमी पर व्रत, भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान, नाम-जप और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। देशभर के कृष्ण मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों के बीच श्रद्धालु कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल हो रहे हैं।

हालांकि एक महत्वपूर्ण बात: कुछ पंचांग विवरणों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र रात 11:04 बजे समाप्त हो जाता है, इसलिए ठीक मध्यरात्रि के जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र मौजूद नहीं रहेगा।




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