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Sunday 25 October 2026
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बांग्लादेश का बदला रुख! चीन की रणनीति को झटका या भारत के लिए नई चुनौती? जानिए पूरा मामला

दक्षिण एशिया में भारत, चीन और बांग्लादेश के बीच रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। बांग्लादेश के चीन के साथ बढ़ते आर्थिक और रक्षा संबंधों के बीच क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। हालांकि, बांग्लादेश के चीन को बड़ा झटका देने के दावे की पुष्टि के लिए संबंधित घटनाक्रम को समझना जरूरी है।

चीन के साथ बढ़ा बांग्लादेश का सहयोग
सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश और चीन के बीच रक्षा एवं व्यापार सहयोग बढ़ रहा है। दोनों देश कूटनीति और रक्षा से जुड़े मुद्दों पर ‘2+2’ संवाद शुरू करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि ढाका अपनी विदेश नीति में चीन के साथ संबंधों को अधिक महत्व दे रहा है।

क्या चीन की भारत को घेरने की रणनीति सफल हो रही है?
चीन लंबे समय से दक्षिण एशिया में अपनी आर्थिक और सामरिक मौजूदगी बढ़ाने में जुटा है। बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह के पास चीनी आर्थिक क्षेत्र विकसित करने और तीस्ता नदी परियोजना में सहयोग जैसे कदमों ने भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ाई हैं। भारत के लिए पूर्वोत्तर राज्यों को शेष देश से जोड़ने वाले संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास के घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण हैं।

बांग्लादेश की रणनीति: चीन से दोस्ती, भारत से भी जरूरी संबंध
बांग्लादेश की नीति को केवल चीन के समर्थन या भारत के विरोध के रूप में देखना सही नहीं होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ढाका बुनियादी ढांचे, व्यापार और रक्षा जरूरतों के लिए चीन के साथ सहयोग बढ़ाते हुए दूसरे देशों के साथ भी संबंध बनाए रखना चाहता है। भारत के साथ उसकी भौगोलिक निकटता, व्यापार, ऊर्जा और संपर्क व्यवस्था के रिश्ते भी बेहद अहम हैं।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
बांग्लादेश और चीन के बढ़ते सहयोग से भारत को अपनी पूर्वी सीमाओं, बंगाल की खाड़ी और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं पर रणनीतिक नजर बनाए रखनी होगी। वहीं, भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार और व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाना भी महत्वपूर्ण रहेगा।




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