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Sunday 20 September 2026
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सीजफायर का असर और भारत की रफ्तार: वर्ल्ड बैंक ने जताया भरोसा, बढ़ाई ग्रोथ रेट

सीजफायर का असर और भारत की रफ्तार: वर्ल्ड बैंक ने जताया भरोसा, बढ़ाई ग्रोथ रेट
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होते ही भारत के लिए गुड न्‍यूज आई है। विश्‍व बैंक ने बुधवार को भारत के ग्रोथ के अनुमानों को बढ़ा दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ऐसा किया गया है। उसने पिछले अक्‍टूबर को भारत के विकास अनुमान को 6.3% रखा था। अब इसे बढ़ाकर 6.6% कर दिया है। इसका कारण मजबूत घरेलू मांग और निर्यात में शानदार प्रदर्शन बताया गया है।

हालांकि, विश्‍व बैंक ने यह भी कहा कि मिडिल ईस्‍ट में जारी संघर्ष से पैदा हुई मुश्किलों के कारण पिछले वर्षों की तुलना में विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी रहने की उम्मीद है।

व‍िश्‍व बैंक का ताजा अपडेट और क्‍या कहता है?
विश्व बैंक के ताजा ‘दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट’ के अनुसार,
वित्त वर्ष 2025-26 में अर्थव्यवस्था के 7.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.1% थी।
भारत की ग्रोथ मजबूत घरेलू मांग और निर्यात से सहारा मिलेगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान थोड़ा ज्‍यादा यानी 6.9% लगाया है।

GST कटौती का फायदा द‍िखना शुरू होगा
रिपोर्ट में बताया गया है कि गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स (जीएसटी) में कटौती से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में उपभोक्ता मांग को बढ़ावा मिलने की संभावना है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं। साथ ही इसके चलते परिवारों की खर्च करने की क्षमता भी सीमित होने का डर है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत में मजबूत मांग, खाने-पीने की चीजों की कीमतों का सामान्य होना और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई को ऊपर ले जा सकती हैं।’

ये द‍िख रही हैं मुश्‍क‍िलें
बढ़ती अनिश्चितता और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के कारण निवेश में भी धीमी रफ्तार से बढ़ोतरी की संभावना है। भले ही भारत के निर्यात को अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे बाजारों तक बेहतर पहुंच से फायदा मिल सकता है। लेकिन, प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में विकास की धीमी रफ्तार इन फायदों को कम कर सकती है।




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