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Wednesday 12 August 2026
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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की हरित विरासत मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की हरित विरासत बना विश्व कीर्तिमान

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की हरित विरासत
बना विश्व कीर्तिमान

शीतल रॉय✍🏻
राष्ट्र की बात

इंदौर ने रविवार को केवल एक विश्व रिकॉर्ड नहीं बनाया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी हरित विरासत लिखी, जिसकी चर्चा दशकों तक होगी। वीरान पड़ी रेवती रेंज की पहाड़ी अब सिर्फ केवल इंदौर की पहचान नहीं रही, बल्कि वह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पर्यावरण संरक्षण के एक असाधारण संकल्प की गवाह बन गई है। जिसकी घोषणा रविवार को एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा रेवती रेंज पर पेड़ों की गणना के बाद 13 लाख 10 हजार पेड़ों की मौजूदगी की घोषणा इस अभियान की सफलता का प्रमाण है। खास बात यह है कि यह उपलब्धि महज पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें दो वर्षों में वृक्ष के रूप में विकसित करने की है। साल 2024 में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में इंदौरवासियों ने रेवती रेंज पर 12 लाख 41 हजार पौधे लगाने का संकल्प साकार किया था। तब शायद कुछ लोगों को यह महज एक बड़ा आयोजन लगा होगा। लेकिन आज वही पौधे वृक्ष बनकर खड़े हैं और पूरी दुनिया के सामने इंदौर की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का प्रमाण दे रहे हैं। इस बार 7 अगस्त से 9 अगस्त तक चली पेड़ों की गिनती के बाद जब 13 लाख 10 हजार से ज्यादा पेड़ों की संख्या सामने आई तो यह स्पष्ट हो गया कि पौधारोपण केवल फोटो खिंचाने का अभियान नहीं था। पौधा लगाना आसान है, उसे वृक्ष बनाना कठिन। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की पहल की असली सफलता इसी दूसरी कसौटी पर दिखाई देती है।

और कहानी यहीं खत्म नहीं होती।पिच्चर तो अभी बाकी है। इस वर्ष भी इंदौर ने 21 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है। रविवार को ही 51 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनकी गिनती अगले वर्ष होगी। यानी आज लगाया गया पौधा कल के रिकॉर्ड की नींव बन चुका है।

राजनीति में नेता अक्सर सड़कों, भवनों, पुलों और योजनाओं के नाम से याद किए जाते हैं। लेकिन कुछ नेतृत्व ऐसे भी होते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हवा, छांव और हरियाली छोड़ जाते हैं।मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की रेवती रेंज की यह पहल इसी दूसरी श्रेणी की राजनीति का उदाहरण बनती दिखाई दे रही है।क्योकि रेवती रेंज कैलाश विजयवर्गीय की हरित सोच की पहली कहानी नहीं है। इसके पहले भी पितृ पर्वत पर उन्होंने ऐसा ही असाधारण प्रयोग किया था। पितरों की स्मृति में लाखों पौधे लगाए गए। आज वही पौधे विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं और कभी सूनी दिखाई देने वाली पहाड़ी हरियाली से आच्छादित है।
पितृ पर्वत की कहानी केवल पेड़ों तक सीमित नहीं रही।

यंहा हनुमान जी की विशाल प्रतिमा की स्थापना ने इस स्थान को आस्था का केंद्र बना दिया। आज पितृ पर्वत केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं के लिए एक तीर्थस्थल बन चुका है। लोग यहां पहुंचते हैं, हनुमान जी के दर्शन करते हैं और हरियाली से घिरे इस धार्मिक परिसर में आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

यंहा कैलाश विजयवर्गीय ने पितृ पर्वत पर आस्था और पर्यावरण को एक साथ खड़ा किया।
एक तरफ पितरों के नाम पर लगाए गए वृक्ष—जो आज आने वाली पीढ़ियों को छाया और प्राणवायु दे रहे हैं, दूसरी तरफ हनुमान जी की विशाल प्रतिमा—जो इस स्थान को धार्मिक पहचान दे रही है।

और अब उसी सोच का विस्तार रेवती रेंज पर दिखाई दे रहा है।
इतिहास केवल इमारतों से नहीं बनता, कभी-कभी इतिहास पेड़ों की छांव में भी लिखा जाता है।
रेवती रेंज पर खड़े ये लाखों वृक्ष आने वाले वर्षों में जब हजारों लोगों को ऑक्सीजन, छाया और पर्यावरण का सुरक्षा कवच देंगे, तब शायद इन पेड़ों को लगाने वाले लोग वहां मौजूद न हों। लेकिन उनकी सोच उनकी दूरदर्शिता वहां मौजूद होगी, उनका संकल्प मौजूद होगा और उनका योगदान हरियाली के रूप में जीवित रहेगा।
कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर को केवल एक रिकॉर्ड नहीं दिया है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं।

आज रेवती रेंज पर खड़े 13 लाख से अधिक पेड़ एक सवाल भी पूछते हैं—हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़कर जाएंगे?
किसी के पास जवाब में आंकड़े होंगे, किसी के पास योजनाएं और किसी के पास भाषण।
लेकिन कैलाश विजयवर्गीय के पास दिखाने के लिए एक पूरी पहाड़ी पर खड़ा हुआ जंगल है।
और यही वह विरासत है, जो किसी नेता को सत्ता के इतिहास से निकालकर समय के इतिहास में अमर करती है।




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