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Saturday 4 April 2026
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एमपी की अदालतों में 20.96 लाख मामले लंबित

एमपी की अदालतों में 20.96 लाख मामले लंबित
राजधानी भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में न्याय व्यवस्था पर लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे अदालतों की कार्यप्रणाली पर गंभीर असर पड़ रहा है। प्रदेश की विभिन्न न्यायालयों में 20 लाख 96 हजार से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से एक मामला ऐसा है जिसका निपटारा 72 साल बाद भी नहीं हो पाया है।

न्याय प्रक्रिया को धीमा कर रहा
पुराने मामलों का अंबार न्याय प्रक्रिया को धीमा कर रहा है, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय मिलना चुनौती बनता जा रहा है। सिविल प्रकृति का यह मुकदमा 1954 में दायर हुआ था। 1982 का एक आपराधिक मामला अब तक निर्णय की प्रतीक्षा में है। इसके अलावा 26 वर्ष से अधिक पुराने 250 मामले भी अब तक निपटारे का इंतजार कर रहे हैं।

सुनवाई की गति प्रभावित

बड़ी संख्या में पुराने मामलों के कारण अदालतों में सुनवाई की गति प्रभावित हो रही है और लोगों को न्याय पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की विभिन्न अदालतों में कुल 20,96,824 मामलों में से 14,44,306 यानी लगभग 68.88 प्रतिशत मामले एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं।

कुल लंबित मामलों में 4,22,905 सिविल और 16,73,919 आपराधिक केस शामिल हैं। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इंदौर में सबसे ज्यादा लंबित मामले सामने आए हैं। यहां कुल 2,38,279 मामले लंबित हैं, जिनमें से 1,82,201 (76.74%) एक वर्ष से अधिक पुराने हैं, जो अन्य शहरों की तुलना में अधिक है। वहीं भोपाल, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।

सबसे दबाव में आपराधिक न्यायालय
आंकड़े बताते हैं कि आपराधिक मामलों का बोझ सबसे ज्यादा है, जिनमें से 12,08,062 मामले यानी लगभग 72.17 प्रतिशत एक वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं। वहीं सिविल मामलों में भी 2,36,244 केस एक साल से अधिक समय से लंबित हैं।

महिलाओं के मामलों में भी वृद्धि
इन न्यायालयों में महिलाओं द्वारा दायर 1,96,450 मामले लंबित हैं। इनमें 93,814 सिविल और 1,02,636 आपराधिक प्रकृति के हैं। बुजुर्गों द्वारा दायर 1,12,371 मामले भी अभी तक लंबित हैं, जिनमें 91,794 सिविल और 20,577 आपराधिक मामले शामिल हैं।

प्रदेश में कुल लंबित मामलों की स्थिति
लंबित मामले – संख्या – एक वर्ष से पुराने

कुल लंबित मामले – 20,96,824 – 14,44,306 (68.88%)

सिविल मामले – 4,22,905 – 2,36,244 (55.86%)

आपराधिक मामले – 16,73,919 – 12,08,062 (72.17%)

प्री-लिटिगेशन/प्री-ट्रायल मामले – 1,24,010 – 58,563 (47.22%)

पांच शहर जहां सबसे ज्यादा मामले

शहर – संख्या – एक वर्ष से पुराने

इंदौर – 2,38,279 – 1,82,201 (76.74%)

भोपाल – 1,46,200 – 1,04,593 (71.54%)

जबलपुर – 1,44,809 – 1,03,465 (71.45%)

रीवा – 98,083 – 77,428 (78.94%)

ग्वालियर – 91,521 – 64,914 (70.93%)

लंबित मामलों की स्थिति

कितने वर्ष से – सिविल – आपराधिक

एक वर्ष पुराने – 1,86,661 – 4,65,857

एक से तीन वर्ष पुराने – 1,39,920 – 5,37,142

तीन से पांच वर्ष – 49,588 – 3,67,074

पांच से दस वर्ष – 38,117 – 2,84,209

दस वर्ष से ज्यादा – 8,619 – 19,637

2000 से पहले – 194 – 56

सबसे पुराना मामला – 1954 – 1982




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