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Monday 7 September 2026
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यूपी में पढ़ाई के साथ रोजगार की तैयारी, योगी सरकार के ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ से हुनरमंद बनेंगे हजारों छात्र

उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ को आगे बढ़ाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत 36,103 विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के साथ ऐसे व्यावहारिक हुनर से जोड़ना है, जो आगे चलकर रोजगार, स्वरोजगार और बेहतर करियर के अवसरों में मददगार साबित हों।

इन क्षेत्रों में मिलेगा प्रशिक्षण
प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत विद्यार्थियों को उनकी रुचि और उपलब्ध प्रशिक्षण के अनुसार आईटी-आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस, कृषि और मैनेजमेंट जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का जोर विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक दक्षता विकसित करने पर रहेगा।

एक बैच में अधिकतम 35 छात्र
प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण की अवधि जरूरत के अनुसार 300 घंटे तक होगी, ताकि नियमित स्कूली पढ़ाई प्रभावित किए बिना विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा सके। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और मूल्यांकन संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल के निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाएगा।

स्कूल स्तर पर ही करियर की तैयारी
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अनुसार, प्रोजेक्ट प्रवीण का मूल उद्देश्य माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें भविष्य की नौकरी एवं उद्यमिता के लिए तैयार करना है। आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक योजना में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को नियमित शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है।

AI से लेकर आधुनिक कौशल तक फोकस
प्रोजेक्ट प्रवीण को भविष्य की तकनीकी जरूरतों से जोड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भी शामिल किया गया है। 2026 में ‘AI for All’ पाठ्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक से परिचित कराया गया है। इससे छात्रों में डिजिटल और तकनीकी कौशल विकसित करने पर सरकार का फोकस साफ दिखाई देता है।

सरकार का लक्ष्य है कि विद्यार्थी शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार की दिशा में आगे बढ़ें। स्कूल स्तर पर ही व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने और भविष्य के करियर विकल्पों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।




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