प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल दौरा, जानिए कब-कब इज़राइल ने निभाई दोस्ती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फ़रवरी को ऐतिहासिक दो दिवसीय इज़राइल दौरे (PM Modi Israel )पर जा रहे हैं। साल 2017 के बाद यह उनका दूसरा इज़राइल दौरा है। इस कूटनीतिक यात्रा की वैश्विक स्तर पर बहुत अहमियत है, लेकिन इस मौक़े पर यह जानना भी बहुत ज़रूरी है कि इज़राइल ने एक सच्चे दोस्त की तरह भारत का मुश्किल वक़्त में कब-कब साथ दिया है। रक्षा, कूटनीतिक और व्यापारिक नज़रिये से दोनों देशों के रिश्ते बहुत मज़बूत रहे हैं। आइए हक़ीक़त और आंकड़ों (Facts & Figures) की रोशनी में इस दोस्ती का जायज़ा लेते हैं।
मुश्किल वक़्त का साथी: 1962 से 1999 तक (राजनयिक और फ़ौजी मदद)
भले ही भारत और इज़राइल के बीच 1992 तक पूर्ण राजनयिक संबंध नहीं थे, लेकिन इज़राइल ने संकट के वक़्त हमेशा भारत की मदद की।
1962 की भारत-चीन जंग: यरूशलम के आर्काइव्स और ऐतिहासिक दस्तावेज़ के मुताबिक़, तत्कालीन इज़राइली प्रधानमंत्री डेविड बेन-गुरियन ने पंडित नेहरू के आग्रह पर भारत को वो भी बिना इज़राइली झंडे के हथियारों की खेप भेजी थी, ताकि भारत के अरब मुल्कों से रिश्ते ख़राब न हों।
1965 और 1971 की जंग: इन दोनों ही मौक़ों पर इज़राइल ने हथियारों और गोला-बारूद (Mortars and ammunition) से भारत की ख़ुफ़िया मदद की थी ( स्रोत: ‘1971’ Book by Srinath Raghavan)।
1999 का कारगिल युद्ध: जब भारतीय फ़ौज को ऊंची पहाड़ियों पर छिपे दुश्मनों को निशाना बनाने में दिक़्क़त आ रही थी, तब इज़राइल ने लेज़र-गाइडेड बम (Laser-guided bombs) और अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAVs) फ़ौरन मुहैया कराए थे। इसी मदद ने जंग का रुख़ मोड़ने में अहम किरदार अदा किया
