Search
Tuesday 3 November 2026
  • :
  • :
Latest Update

ऊर्जा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का बड़ा लक्ष्य, 5.60 लाख करोड़ के निवेश से बदलेगी तस्वीर; 2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में करीब 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं सामने आई हैं। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

राज्य सरकार का फोकस पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर है। इस दिशा में नए निवेश, आधुनिक तकनीक और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हरित ऊर्जा परियोजनाओं के विकास से राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी गति मिलने की उम्मीद है।

नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में 1.33 लाख करोड़ का निवेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 2 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो-2026 में छत्तीसगढ़ की ऊर्जा विकास कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि अगले पांच वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की 23,923 मेगावाट क्षमता विकसित करने के लिए लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। वहीं, ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार के लिए करीब 3.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश की रूपरेखा तैयार की गई है।

पंप स्टोरेज और बैटरी परियोजनाओं पर विशेष जोर
हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के साथ बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य में 12,300 मेगावाट क्षमता की 10 पंप स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं। इनमें लगभग 65 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है। राजनांदगांव में 100 मेगावाट सौर परियोजना के साथ 40 मेगावाट/120 मेगावाट-घंटे की बैटरी स्टोरेज प्रणाली पहले से संचालित है।

सौर ऊर्जा से गांवों और किसानों को लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजनांदगांव जिले का खैरा गांव प्रदेश का पहला पूर्ण सौर ऊर्जा आधारित गांव बन चुका है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत राज्य में लगभग 1.26 लाख सौर संयंत्र स्थापित किए गए हैं। वहीं, 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों के माध्यम से करीब 1.94 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की जा रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत 395 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र विकसित करने की भी योजना है।

बायोगैस और परमाणु ऊर्जा में भी निवेश की तैयारी
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए कृषि अवशेष और गोबर से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनॉल तथा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। प्रदेश में 80 मीट्रिक टन क्षमता के आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना है, जिनमें करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके साथ ही लगभग 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित अन्य ऊर्जा परियोजनाओं के लिए करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है।

मुख्यमंत्री साय ने समिट में छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को प्रस्तुत करते हुए देश-विदेश के निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों से प्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। ऊर्जा क्षेत्र में प्रस्तावित योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश में नई परियोजनाओं, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *