दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष मानी जा रही है। इस अवसर पर शनि और चंद्रमा की युति का संयोग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिष शास्त्र में शनि और चंद्रमा के इस संयोग को विष योग के नाम से भी जाना जाता है।
मान्यता है कि शनि अनुशासन, कर्म और न्याय के कारक हैं, जबकि चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों ग्रहों की युति के कारण कुछ राशियों के जातकों को मानसिक तनाव, कार्यों में देरी और निर्णय लेने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और यमराज की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने, दीपदान करने और घर के आसपास स्वच्छता रखने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन नकारात्मक विचारों से दूर रहना, वाणी पर संयम रखना और जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय लेने से बचना शुभ माना जाता है।
ध्यान रहे कि शनि-चंद्र युति का प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और अन्य ज्योतिषीय कारकों पर भी निर्भर करता है।
