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Monday 23 March 2026
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Nepal में तख्तापलट के बाद पहली बार दिखे केपी शर्मा ओली

Nepal में तख्तापलट के बाद पहली बार दिखे केपी शर्मा ओली
नेपाल (Nepal) में तख्तापलट के बाद पहली बार पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए। गुरुवार को उन्हें सेना के हेलिकॉप्टर से शिवपुरी सैन्य बैरक से भक्तपुर लाया गया। यहां वह एक किराए के मकान में रह रहे हैं। केपी शर्मा ओली युवाओं के विद्रोह के बाद शिवपुरी के सैन्य बैरक में रह रहे थे।

ओली के घर को प्रदर्शनकारियों ने फूंक दिया
9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने उनके काठमांडू (Kathmandu) स्थित निजी घर सहित झापा में रहे उनके पैतृक निवास और दमक में उनके घर में आगजनी कर दी थी। इस वजह से उनके लिए दूसरा किराए का घर ढूंढा गया। उन्हें सेना के हेलिकॉप्टर से पहुंचाया गया। ओली के भक्तपुर पहुंचने पर वहां उनके समर्थकों ने स्वागत किया।

नेपाली युवाओं ने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने और भ्रष्टाचार को लेकर 8 सितंबर को विरोध किया था। पुलिस ने विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए फायरिंग की। इसमें कई लोगों की मौत हो गई। इससे विद्रोह प्रदर्शन और अधिक उग्र हो गया। 9 सितंबर को युवाओं ने संसद भवन, सिंहदरबार, पीएम और राष्ट्रपति आवास में आगजनी की। सेना के दवाब में आकर पीएम केपी शर्मा ओली ने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सेना ने उन्हें रेस्क्यू करते हुए शिवपुरी बैरक में सुरक्षित रखा।

जेल में बिताए 14 साल
22 फरवरी 1952 को पूर्वी नेपाल के तेहरीथुम जिले में जन्मे ओली का जीवन संघर्षों से भरा रहा। मात्र 12 वर्ष की आयु में वे झापा चले गए और मार्क्स-लेनिन विचारधारा से प्रभावित होकर 1966 में कम्युनिस्ट राजनीति में प्रवेश किया। 1968 में पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने, लेकिन राजतंत्र विरोधी गतिविधियों के कारण 1970-80 के दशक में 14 वर्ष जेल में बिताए, जिसमें चार वर्ष एकाकी कारावास भी शामिल था।

1991 में पहली बार प्रतिनिधि सभा के सदस्य चुने गए
ओली, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (UML) में तेजी से उभरे। साल 1991 में पहली बार प्रतिनिधि सभा सदस्य चुने गए। 1994 में गृह मंत्री बने और पार्टी के पोलित ब्यूरो में प्रवेश किया। 1999 में तीसरी बार सांसद बने। 2006-07 में उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रहे। साल 2013 के संविधान सभा चुनाव में झापा से जीते और नेपाल के नए संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2015 में पहली बार बने नेपाल के पीएम
2015-16 में पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन छोटा कार्यकाल रहा। 2018-2021 में दूसरे कार्यकाल में राष्ट्रवादी नीतियां अपनाईं, भारत के साथ तनाव बढ़ा, लेकिन चीन से संबंध मजबूत किए। 2021 में पार्टी विवादों के कारण पद छोड़ना पड़ा। जुलाई 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन भ्रष्टाचार, आर्थिक ठहराव और सेंसरशिप के आरोपों से जूझे। सितंबर 2025 में युवा-नेतृत्व वाले एंटी-करप्शन प्रदर्शनों में 19 मौतों के बाद इस्तीफा दे दिया।




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