छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए श्रम कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार का फोकस श्रमिकों को सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने पर रहा है।
राज्य में संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों के पंजीयन और योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने के लिए यूजर-फ्रेंडली वेबसाइट और ‘श्रम एव जयते’ मोबाइल एप विकसित किया गया है।
17.82 लाख श्रमिकों को मिला योजनाओं का लाभ
श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच करीब 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया। वहीं लगभग 17.82 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया गया, जिस पर करीब 800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। लाभार्थियों तक सहायता राशि पहुंचाने में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT व्यवस्था का उपयोग किया जा रहा है।
सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालय
श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालयों का संचालन सुनिश्चित किया गया है। पांच नए जिलों में श्रम अधिकारी कार्यालयों की स्थापना के लिए पदों का सृजन भी किया गया है। इसके साथ ही श्रम कानूनों में किए गए विभिन्न संशोधनों के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और श्रमिक अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
आवास से लेकर शिक्षा तक सहायता
श्रमिक परिवारों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत आवास सहायता राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये की गई है। इसके अलावा मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता, छात्रवृत्ति, शिक्षा सहायता और अन्य योजनाओं के जरिए श्रमिक परिवारों को आर्थिक संबल दिया जा रहा है।
महिला श्रमिकों को भी मिला सहारा
महिला श्रमिकों के लिए भी सरकार ने कई योजनाएं संचालित की हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता प्रदान की गई है। वहीं ‘शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना’ के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए मेधावी शिक्षा सहायता, छात्रवृत्ति और निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग जैसी योजनाओं का भी संचालन किया जा रहा है।
24 घंटे उपलब्ध सहायता केंद्र
श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र को 24 घंटे, सातों दिन संचालित किया जा रहा है। मोबाइल शिविरों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में भी श्रमिकों का पंजीयन, नवीनीकरण और आवेदन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि तकनीकी नवाचार, पारदर्शिता, त्वरित सेवा और सामाजिक सुरक्षा को केंद्र में रखकर किए गए इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ ने श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। पिछले ढाई वर्षों की ये पहल लाखों श्रमिक परिवारों के लिए सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक मजबूती का आधार बनी हैं।
