सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान पड़ने वाली सावन शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा और शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। इस बार सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया भी रहेगा, ऐसे में पूजा और जलाभिषेक के शुभ समय को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्सुकता है।
सावन शिवरात्रि पर भद्रा का प्रभाव
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, भद्रा काल में कुछ शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि भगवान शिव की पूजा और अभिषेक के लिए विशेष मुहूर्त का महत्व होता है। इसलिए श्रद्धालुओं को भद्रा काल को ध्यान में रखते हुए शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए।
शिवलिंग के जलाभिषेक का शुभ समय
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव के अभिषेक के लिए प्रदोष काल और निशिता काल को विशेष माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त में शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकते हैं। जलाभिषेक के दौरान भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।
कैसे करें भगवान शिव का अभिषेक?
सावन शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर सबसे पहले जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक किया जा सकता है। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
सावन शिवरात्रि के दिन पूजा करते समय श्रद्धालुओं को सात्विकता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते समय उसकी चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखने की परंपरा है। साथ ही पूजा के दौरान भगवान शिव को तुलसी, सिंदूर और हल्दी अर्पित करने से बचना चाहिए।
धार्मिक मान्यता: सावन शिवरात्रि पर सच्चे मन से भगवान शिव का पूजन और अभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है। हालांकि शुभ मुहूर्त और भद्रा की सटीक अवधि के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को जरूर देखें, क्योंकि स्थान के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।
