उत्तर प्रदेश में पशुओं का बीमा कराएगी योगी सरकार
पशुपालकों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। कैबिनेट ने बैठक में मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य योजना) की कार्ययोजना और वित्तीय प्रविधान को स्वीकृति दे दी है।
इसके तहत बीमा प्रीमियम की 85 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी और पशुपालन को केवल 15 प्रतिशत राशि ही अदा करनी होगी।
पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि योजना का उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुओं की मृत्यु या दुर्घटना से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रविधान किया गया है। योजना 75 जिलों में लागू होगी। इसके तहत 2,28,350 पशुओं का बीमा कराने का लक्ष्य है, इनमें 1,86,800 पशुओं का बीमा सामान्य मद और 41,550 पशुओं का बीमा एससी-एसटी कंपोनेंट में किया जाएगा।
लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फार्म के पशुपालकों व अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा। यदि किसी पशु की महामारी, दैवीय आपदा, आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है या वह अनुपयोगी हो जाता है तो बीमा के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
मंत्री ने बताया कि योजना में दावा निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है। एक महीने के अंदर बीमा राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा कराया जाएगा।
पशु की मृत्यु होने पर बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (पीटीडी) हो जाता है तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी। योजना में पशुपालन व डेयरी विकास योजनाओं में लाभांवित पशुओं के बीमा को प्राथमिकता दी जाएगी।
केंद्र द्वारा संचालित योजना में बीमा पर लगी है रोक
पूर्व में केंद्र सरकार द्वारा संचालित जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना के तहत पशु बीमा कराया जाता था। योजना में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार 40 प्रतिशत राशि खर्च करती थी। केंद्र सरकार की ओर से सामान्य और पिछड़ा वर्ग के लिए सामान्य मद में बीमा पर पिछले वर्ष ही रोक लगा दी थी।
इसके बाद बीते 11 अप्रैल को एससी/एसटी कंपोनेंट के तहत संबंधित बीमा कंपनी से अनुबंध खत्म होने के कारण पशु बीमा पर भी रोक लग गई थी। अब मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन व पशुधन बीमा योजना में पशुपालक अपने पशुओं का बीमा करा सकेंगे।
