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Sunday 26 July 2026
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धार भोजशाला विवाद पर कल आएगा इंदौर हाईकोर्ट का फैसला

धार भोजशाला विवाद पर कल आएगा इंदौर हाईकोर्ट का फैसला
इंदौर में धार के विवादित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद पर शुक्रवार (15 मई) को फैसला आ सकता है. सुप्रीम कोर्ट के वकील और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सीनियर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने एक्स पर इसकी जानकारी दी है.

दरअसल, छह अप्रैल 2026 से सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इंदौर हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई जारी थी. वहीं दो दिन पहले सभी पक्षों की सुनवाई पूरी हो चुकी है. पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन को सुनने के बाद इंदौर हाईकोर्ट डबल बैंच ने फैसला सुरक्षित रखा था.

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू की. सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

सभी पक्षों ने पेश कीं दलीलें
यह सुनवाई विवादित स्मारक से जुड़े अलग-अलग धार्मिक विश्वासों, ऐतिहासिक दावों, कानूनी प्रावधानों की जटिलताओं के साथ ही हजारों दस्तावेजों की पृष्ठभूमि में हुई. सुनवाई के दौरान हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों के याचिकाकर्ताओं ने विस्तृत दलीलें पेश कीं और स्मारक में अपने-अपने समुदाय के लोगों के लिए उपासना का विशेष अधिकार मांगा. यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है.

हिंदू पक्ष मंदिर मुस्लिम पक्ष मानता है मस्जिद
बता दें कि धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है. वहीं, जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता ने विवादित परिसर में मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया है और कहा है कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू समुदाय भोजशाला में स्थापित वाग्देवी की प्रतिमा बता रहा है, वह असल में जैन यक्षिणी अम्बिका की मूर्ति है.




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