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Sunday 22 March 2026
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115 मौतों के बाद भी अधूरा रतनगढ़: सियासत, एजेंसियां और सिस्टम—सबने रोका शक्तिपीठ का विकास

115 मौतों के बाद भी अधूरा रतनगढ़: सियासत, एजेंसियां और सिस्टम—सबने रोका शक्तिपीठ का विकास
रतनगढ़ शक्तिपीठ में 2013 की भगदड़ के बाद भी विकास कार्य अधूरे हैं। 2021 में स्वीकृत 5 करोड़ के काम तीन एजेंसियों में बंट गए। शेड, कॉरिडोर और विश्राम गृह आज भी अधूरे हैं। जिम्मेदारों के अलग-अलग बयान सिस्टम की सुस्ती उजागर करते हैं।

दतिया के रतनगढ़ शक्तिपीठ में 2013 की भयावह भगदड़ को एक दशक से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन 115 जानें गंवाने के बाद भी व्यवस्थाओं में वह ठोस सुधार नहीं दिखता, जिसकी उम्मीद थी। मंजूर योजनाएं फाइलों और एजेंसियों के बीच उलझकर रह गईं और मंदिर का विकास सियासी खींचतान की भेंट चढ़ता चला गया।

हादसे के बाद नहीं टूटी उदासीनता
दतिया जिले के रतनगढ़ देवी मंदिर में 12 साल पहले मची भगदड़ ने देशभर का ध्यान खींचा था, लेकिन हादसे की भयावहता भी प्रशासनिक उदासीनता को नहीं तोड़ सकी। मंदिर परिसर में सुरक्षा, आवागमन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े अधिकतर काम या तो शुरू नहीं हुए या अधूरे पड़े हैं।

रतनगढ़ मामले में प्रशासन का रुख लचर
चार दिन पहले दतिया के पीतांबरा माई मंदिर में निर्माण के दौरान 8 खंभे गिरने की घटना के बाद जहां जिला प्रशासन ने त्वरित निगरानी समिति बनाई। जो निर्माण मामलों में मंदिर ट्रस्ट के समानांतर काम करेगी। वहीं,रतनगढ़ शक्तिपीठ को लेकर शासन-प्रशासन का रवैया आज भी ढीला नजर आता है।

115 लोगों ने गंवाई थी जान
2013 में कार्तिक मेले के दौरान हुई भगदड़ में 115 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। चुनावी माहौल में हुए इस हादसे ने तत्कालीन सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। कलेक्टर-एसपी समेत 4 अधिकारियों के निलंबन और न्यायिक जांच के बाद भी रिपोर्ट की सिफारिशें जमीन पर नहीं उतर सकीं।
5 करोड़ की रकम मंजूर,काम अधूरे

2021 में चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने रतनगढ़ परिसर के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये मंजूर किए। यह राशि सिंगरौली जिला खनिज मद से दिलाई गई। इससे मंदिर परिसर में एक बड़ा शेड,चौड़ी सीढ़ियां,कॉरिडोर,विश्राम गृह,पुलिस चौकी सहित अन्य काम प्रस्तावित थे।

निर्माण एजेंसी तय करने को लेकर रस्साकसी
निर्माण कार्यों के प्रोजेक्ट हासिल करने को लेकर प्रदेश की निर्माण एजेंसियों के बीच कड़ी स्पर्धा नई बात नहीं है। रतनगढ़ मंदिर के मामले में भी यही हुआ। शुरुआती दौर में यह काम संस्कृति विभाग को सौंपा गया। जिसका निर्माण कार्यों से दूर—दूर तक नाता नहीं। बीते सत्र में स्थानीय विधायक ने इस मामले में सदन में चिंता जताई तो बताया गया कि यह काम अब पीडब्ल्यूडी को सौंपा गया है लेकिन इसी बीच एक अन्य निर्माण एजेंसी मप्र हाउसिंग बोर्ड की इसमें एंट्री हुई।

तीन एजेंसियों में बंटा मंदिर का काम
आलम यह ​है कि मंदिर में सिर्फ 5 करोड़ का काम तीन एजेंसियों के बीच बांटा गया है। मप्र हाउसिंग बोर्ड वहां विश्राम गृह तैयार करा रहा है। इसका चालीस फीसदी से अधिक काम अभी बाकी है। डेढ़ करोड़ लागत के शेड्स के लिए लोक निर्माण विभाग ने हाल ही में निविदाएं बुलाईं हैं। वहीं,कॉरिडोर निर्माण के लिए लोनिवि के ही पाइकू प्रोजेक्ट को बजट आवंटन की दरकार है। इसके बाद ही वह टेंडर बुलाएगा।

जिम्मेदारों के अलग—अलग बयान
इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के बयान अलग—अलग हैं। इलाके के एसडीएम अशोक अवस्थी कहते हैं—काम शुरू हो गया है।अलग—अलग एजेंसियों के पास काम है। सभी अपने—अपने स्तर से इसे पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं,लोकनिर्माण विभाग दतिया के एसडीओ कहते हैं—हमारा काम शेड् बनाने का है। वह चल रहा है। कॉरिडोर निर्माण के बारे में वह कुछ नहीं कह सकते।

वहीं,लो​निवि पाइकू प्रोजेक्ट के क्षेत्र प्रमुख राजेंद्र त्रिपाठी ने कहा— अभी बजट आया है।जल्द निविदा बुलाएंगे। जबकि,मंदिर के प्रमुख महंत राजेश कटारे इस मामले में कुछ भी बोलने से बचे। महंत ने कहा—अफसरों से ही पूछो,वही ज्यादा बता सकेंगे। मेरा बोलना ठीक नहीं।




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