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Saturday 14 February 2026
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आस्था अंधी नही सजग होनी चाहिए

आस्था अंधी नही सजग होनी चाहिए

संत की मर्यादा बनाम आरोपों का तूफान

शीतल रॉय ✍🏻

भारतीय सनातन परंपरा में संत केवल व्यक्ति नहीं विचार, विश्वास और विरासत होते हैं। इसलिए जब किसी हिंदू संत पर चरित्र हनन के आरोप लगते हैं, तो यह घटना महज कानूनी विवाद नहीं रह जाती, बल्कि एक व्यापक वैचारिक युद्ध का रूप ले लेती है। यह वह क्षण होता है, जब धर्म, राजनीति, मीडिया और राष्ट्रीय विचारधाराएं एक बिंदु पर टकराती दिखाई देती हैं।
किसी संत पर चरित्र हनन के आरोप लगते ही धर्म विरोधी शक्तियों की सक्रियता बढ़ जाती है,इतिहास गवाह है कि जैसे ही किसी संत पर आरोप लगता है, कुछ संगठित शक्तियां इसे पूरे हिंदू धर्म के खिलाफ हथियार बना लेती हैं। जैसे – एक व्यक्ति के आरोप को पूरे सनातन तंत्र की विफलता बताना मीडिया ट्रायल के जरिए “संत” शब्द को ही संदिग्ध बना देना क्योंकि भारतीय समाज में संत केवल धार्मिक मार्गदर्शक नहीं होते, बल्कि वे आस्था, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतीक माने जाते हैं। जब किसी हिंदू संत पर चरित्र हनन या गंभीर आरोप लगते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का संकट नहीं होता यह पूरे समाज की आस्था, विश्वास और नैतिक संरचना को झकझोर देता है।
संतों पर लगे आरोप समाज को दो हिस्सों में बाँट देते हैं। एक वर्ग बिना जांच के संत का बचाव करता है, तो दूसरा बिना प्रमाण के उन्हें दोषी ठहराने लगता है। इस टकराव में सत्य अक्सर दब जाता है और समाज में अविश्वास, भ्रम और कटुता का वातावरण बनता है। सबसे अधिक आघात उन लोगों को लगता है, जिनकी आस्था इन संतों से जुड़ी होती है।
संत का जीवन केवल निजी नहीं होता, वह सार्वजनिक होता है। इसलिए संतों को अपने आचरण में अत्यधिक पारदर्शिता, संयम और अनुशासन रखना चाहिए और
स्त्री-पुरुष संबंधों में स्पष्ट मर्यादा एवं निजी जीवन में शुचिता अनुयायियों के साथ सीमाओं का पालन।
आज के दौर में संतों को यह समझना होगा कि एक छोटी सी चूक भी पूरे संत समाज की प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगा सकती है।
संत समाज का मार्गदर्शक होता है, लेकिन जब उस पर आरोप लगते हैं, तो समाज को न तो अंधभक्ति में डूबना चाहिए और न ही बिना प्रमाण के पत्थर उठाने चाहिए।
सच्ची आस्था वही है, जो सत्य और न्याय के साथ खड़ी हो। यह समय है जब संत अपनी मर्यादा को और सख्ती से निभाएं, समाज विवेक से काम ले और सरकार न्याय की निष्पक्षता सुनिश्चित करे तभी धर्म, न्याय और मानवता का संतुलन बना रह सकता है …




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