देशभर में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में इंदौर का मॉडल एक बार फिर चर्चा में है। दिल्ली में मंगलवार को MCD और IIT दिल्ली की ओर से ठोस कचरा प्रबंधन पर आयोजित कार्यशाला में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने इंदौर के कचरा प्रबंधन मॉडल को प्रभावी उदाहरण बताते हुए इसकी उपयोगी व्यवस्थाओं को दिल्ली में अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कचरा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और प्रभावी बनाना था। इस दौरान कचरे को लैंडफिल में भेजने के बजाय ‘Waste-to-Wealth’ मॉडल की ओर बढ़ने पर जोर दिया गया। इसमें कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसका पुनर्चक्रण, प्रसंस्करण और उपयोगी संसाधनों में रूपांतरण करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
इंदौर के मॉडल से सीखने की कोशिश
इंदौर की व्यवस्था में स्रोत पर कचरा पृथक्करण, व्यवस्थित संग्रहण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने कहा कि इंदौर जैसे शहरों की सफल व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें दिल्ली की जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जाना चाहिए।
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी कार्यशाला में शहर के स्वच्छता मॉडल और नागरिक भागीदारी के महत्व को सामने रखा। उन्होंने Zero Waste Wards, Zero Waste Colonies और Zero Waste Roads जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए व्यवहार परिवर्तन और विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन को प्रभावी बताया।
4-बिन व्यवस्था और तकनीक पर जोर
कार्यशाला में कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी और घरेलू खतरनाक कचरा जैसी श्रेणियों में अलग करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, स्रोत पर सही तरीके से कचरा अलग होने से रीसाइक्लिंग और वैज्ञानिक प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलेगा तथा लैंडफिल पर दबाव कम किया जा सकेगा।
इस बीच, केंद्र सरकार के आवास एवं शहरी मा
