cwg-भारत ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है। भारत ने जूडो में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीता है। पहले अस्मिता डे ने महिला 48 किग्रा वर्ग में सोना अपने नाम किया और अब हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता। हर्ष ने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को 10-0 से हराकर भारत को स्वर्ण दिलाया। हर्ष राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने वाले दूसरे और पहले पुरुष जूडोका हैं। अस्मिता और हर्ष से पहले अब तक किसी भारतीय जूडोका ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता है।
अस्मिता CWG में स्वर्ण जीतने वाली पहली जूडोका
भारतीय जूडिका अस्मिता डे ने शानदार प्रदर्शन किया और सोने का तमगा हासिल करने में सफल रहीं। त्रिपुरा की 23 वर्ष की अस्मिता का यह स्वर्ण ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले भारत की ओर से किसी भी जूडोका ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता था। अस्मिता का सामना फाइनल में कनाडा की हेडी काच से हुआ। अस्मिता फाइनल मुकाबले में 0-1 से पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने जल्द ही वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। चार मिनट का निर्धारित समय पूरा होने के बाद मुकाबला सडन डैथ तक खींचा, जहां इस भारतीय जूडोका ने 2-1 से मुकाबला अपने नाम कर सोना अपने नाम किया। मालूम हो कि सडन डैथ में पहले स्कोर करने वाले को विजेता घोषित किया जाता है।
जूडो में ऐतिहासिक प्रदर्शन
भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में पहली बार 1990 में ऑकलैंड में हुए खेलों के दौरान हिस्सा लिया था। इस ऐतिहासिक पहले संस्करण में ही भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक भी जीते थे। नरेंद्र सिंह (60 किग्रा भार वर्ग) और राजिंदर कुमार ढांगर (86 किग्रा भार वर्ग) ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। हालांकि, इसके बाद भारत राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य और रजत पदक जीतता रहा, लेकिन कभी भी कोई भारतीय जूडोका स्वर्ण पदक अपने नाम नहीं कर सका था। आज यह तिलिस्म भी टूटा। पहले अस्मिता और अब हर्ष ने एक ही दिन में जूडो में दो स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाले।
अस्मिता ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में किया था दमदार प्रदर्शन
फाइनल से पहले अस्मिता ने सेमीफाइनल में दमदार प्रदर्शन किया था। युवा खिलाड़ी अस्मिता डे ने बेहद रोमांचक मुकाबले में स्कॉटलैंड की समर शॉ को ‘युको’ के आधार पर हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। एक समय हार की कगार पर पहुंच चुकीं अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की थी। इससे पहले अस्मिता ने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को ‘इप्पोन’ से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी। जूडो में ‘इप्पोन’ को सर्वोच्च स्कोर माना जाता है जिसके मिलते ही मुकाबला समाप्त हो जाता है। ‘युको’ अपेक्षाकृत कम अंक वाला स्कोर है।
