8 जून को INDIA गठबंधन की अहम बैठक
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया है कि आगामी INDIA गठबंधन की बैठक में 23 राजनीतिक दलों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। यह अहम बैठक सोमवार, 8 जून 2026 को दोपहर 12 बजे नई दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित की जाएगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश के वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य पर गहन विचार-विमर्श करना और भविष्य की रणनीति तैयार करना है।
हालांकि, कुछ राजनीतिक दलों ने अपनी विभिन्न आंतरिक या अन्य अपरिहार्य कारणों से इस विशेष बैठक में शामिल होने में असमर्थता व्यक्त की है। इन अनुपस्थित दलों ने स्पष्ट किया है कि उनकी गैर-मौजूदगी का यह अर्थ कतई नहीं है कि वे वर्तमान मोदी सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली से सहमत हैं। इसके विपरीत, इन दलों ने मोदी सरकार की उन नीतियों और कार्रवाइयों का कड़ा विरोध व्यक्त किया है, जिनका सीधा असर लाखों भारतीयों के जीवन और देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर पड़ रहा है।
विपक्षी दलों का मोदी सरकार पर आरोप
इन दलों ने विशेष रूप से मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह लाखों भारतीयों से उनके वोट देने का अधिकार छीनने का प्रयास कर रही है। उनका मानना है कि सरकार ऐसी नीतियां और प्रक्रियाएं लागू कर रही है, जो आम जनता को अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित कर सकती हैं, जो किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है।
इसके साथ ही, इन अनुपस्थित दलों ने यह भी कहा है कि मोदी सरकार द्वारा प्रतिदिन संविधान पर हमला किया जा रहा है। उनका तर्क है कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लगातार कमजोर कर रही है और संविधान में निहित मूल सिद्धांतों का उल्लंघन कर रही है, जिससे देश का संघीय ढांचा और लोकतांत्रिक मूल्य खतरे में पड़ गए हैं।
जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर विपक्षी दलों ने जताई आपत्ति
विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए जांच एजेंसियों के दुरुपयोग पर भी इन दलों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है, ताकि विपक्षी आवाजों को दबाया जा सके और राजनीतिक विरोध को कुचला जा सके। यह कार्रवाई लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
करोड़ों भारतीयों की रोजी-रोटी को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली सरकारी नीतियों को भी इन दलों ने आड़े हाथों लिया है। उनका मानना है कि सरकार की आर्थिक नीतियां रोजगार सृजन में पूरी तरह विफल रही हैं और इसने बड़े पैमाने पर लोगों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे बेरोजगारी और गरीबी में लगातार वृद्धि हुई है।
लगातार बढ़ती महंगाई के जरिए घरेलू बजट को बिगाड़ने के लिए भी मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की गई है। इन दलों का कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही हैं, जिससे आम आदमी का जीवनयापन मुश्किल हो गया है और घरों का मासिक बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है, जिससे जनता त्रस्त है।
